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सूर्य के राशि बदलने से हुआ ऋतु परिवर्तन:15 जनवरी से शुरू हुई शिशिर ऋतु, इस मौसम में तिल-गुड़ खाने और दान देने की परंपरा

gmedianews24.com.हेमंत ऋतु खत्म होकर अब शिशिर ऋतु की शुरुआत 15 जनवरी से हो गई है। जो 14 मार्च तक रहेगी। इसके बाद बसंत ऋतु शुरू हो जाएगी। ठंड के मौसम के दो हिस्से होते हैं, हल्की गुलाबी ठंड वाला वक्त हेमंत ऋतु का होता है तो तेज ठंड शिशिर ऋतु के समय होती है। इन ऋतुओं के मुताबिक ही हमारी परंपराएं बनी हुई हैं।

धर्मग्रंथों में बताए व्रत-पर्व और परंपराएं ठंड को ध्यान में रख कर ही बनाए गए हैं। जो सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं। इस दौरान मकर संक्रांति, लोहड़ी, पोंगल, तिल चतुर्थी, अमावस्या और पूर्णिमा पर्व मनाए जाते हैं। इन उत्सवों और त्योहारों की परंपराएं मौसम को ध्यान में रखते हुए बनाई गई हैं।

उत्तरायण में होती है शीत ऋतु
शीत ऋतु के दौरान सूर्य, मकर और कुंभ राशियों में रहता है। शनि की राशियों में सूर्य के आ जाने से मौसम में रूखापन बढ़ जाता है। यह सूर्य का उत्तरायण काल होता है, इस दौरान शारीरिक ताकत में भी कमी आने लगती है।

पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि इस बार शीत ऋतु की शुरुआत पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में हुई है। इस नक्षत्र के स्वामी बृहस्पति होने से देश के उत्तरी हिस्सों में मौसमी बदलाव होने की संभावना बन रही है। देश के कई हिस्सों में तेज ठंड और बर्फबारी होने की आशंका भी है।

शीत ऋतु में पूजा-पाठ और दान
शीत ऋतु के दौरान अगहन और पौष महीना रहता है। इसलिए इस ऋतु में जरूरतमंद लोगों को वस्त्र और अन्नदान करने का बहुत महत्व होता है। शीत ऋतु के दौरान सूर्य पूजा का भी महत्व है।

इस परंपरा को वैज्ञानिक नजरिये से देखा जाए तो इन दिनों में कैल्शियम की कमी दूर करने के लिए तिल और गुड़ से बनी चीजें खाई जाती हैं। सूरज की किरणों में विटामिन डी होता है। इसलिए ठंड के दिनों में सुबह जल्दी धूप में यानी सूरज के सामने खड़े होकर पूजा की जाती है।

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