बाली वध प्रसंग की सीख:घर-परिवार में विचारों की पवित्रता बनाए रखें, रिश्तों में गलत भावनाएं नहीं होनी चाहिए

gmedianews24.com.22 जनवरी को अयोध्या में श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा है। श्रीराम की पूजा के साथ ही उनसे जुड़ी घटनाओं में छिपे संदेशों को जीवन में उतार लिया जाए तो हमारी सभी दिक्कतें दूर हो सकती हैं। रामायण के बालि वध प्रसंग में श्रीराम ने संदेश दिया है कि रिश्तों में, घर-परिवार में प्रेम और अपनापन बनाए रखना चाहिए, गलत भावनाओं से बचें, वर्ना रिश्ते टूट सकते हैं। पढ़िए पूरा प्रसंग…
सुग्रीव अपने भाई बाली की वजह से छिप-छिपकर जंगल में रह रहे थे। हनुमान जी ने श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता करा दी थी। इन दोनों ने एक-दूसरे की मदद करने का संकल्प लिया। इसके बाद श्रीराम ने सुग्रीव की समस्या हल करने की योजना बनाई।
श्रीराम के कहने पर सुग्रीव एक माला पहनकर अपने भाई बालि से युद्ध करने पहुंच गए। इससे पहले बाली ने एक बार सुग्रीव को मारकर भगा दिया था। अब दूसरी बार श्रीराम पर फिर से भरोसा करके सुग्रीव बाली से युद्ध करने पहुंच गए।
बाली और सुग्रीव दोनों भाई लड़ रहे थे, उस समय श्रीराम ने एक बाण छोड़ा और वह सीधे बाली की छाती में लगा। बाली बुरी तरह घायल हो गया।
अंतिम सांसें लेते हुए बाली ने श्रीराम से कहा कि आपका अवतार धर्म के लिए हुआ है, आपने मुझे छिपकर क्यों मारा? सुग्रीव आपका प्रिय और मैं आपका दुश्मन क्यों बन गया?
श्रीराम ने बाली से कहा कि तुम्हारी पत्नी तारा ने तुम्हें समझाया था कि राम से मत लड़ो।
ये बात सुनते ही बाली को याद आया कि तारा ने कहा था कि राम भगवान हैं, उनसे बैर नहीं लेना चाहिए। बाली ने सोचा कि ये बात तो एकांत में मेरी पत्नी ने मुझसे कही थी, ये राम को कैसे मालूम हुई?
श्रीराम की सीख
श्रीराम ने समझाया कि छोटे भाई की पत्नी, बहन, पुत्र की पत्नी, पुत्री ये चारों रिश्ते एक समान हैं। तुमने अपने छोटे भाई सुग्रीव की पत्नी का अपहरण कर लिया। मेरा प्रण है कि जो लोग रिश्तों में पवित्रता नहीं रखते हैं, जिनकी भावनाएं अच्छी नहीं हैं, जो पाप करते हैं, मैं उन्हें दंड जरूर दूंगा। मैंने तुम्हें इसी पाप का दंड दिया है।